बिना मान्यता स्कूल पर लाखों रुपये के जुर्माने की रिकवरी न होने पर अपर मुख्य सचिव से शिकायत, अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

गाजियाबाद/मुरादनगर के ओलंपिक चौराहे के पास पंचायती धर्मशाला में संचालित लीलावती रामगोपाल सरस्वती विद्यालय के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के तहत लगाए गए आर्थिक दंड की अब तक वसूली न होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है शिकायत में कहा गया है कि विद्यालय के बिना मान्यता संचालित होने की शिकायतों के आधार पर 4 जुलाई 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी, मुरादनगर ने औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कक्षा 1 से 3 तक का संचालन होता मिला, जबकि इससे पहले विद्यालय प्रबंधन ने विभाग को लिखित प्रार्थना पत्र देकर दावा किया था कि कक्षा 1 से 3 का संचालन बंद कर दिया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इससे स्पष्ट होता है कि विद्यालय प्रबंधन ने विभाग को भ्रामक एवं असत्य जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया शिकायत के अनुसार निरीक्षण के बाद शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत विद्यालय पर ₹1 लाख का आर्थिक दंड तथा विद्यालय का संचालन जारी रहने की स्थिति में ₹10 हजार प्रतिदिन अतिरिक्त दंड लगाए जाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद आज तक उक्त जुर्माने की रिकवरी नहीं की गई है शिकायतकर्ता का आरोप है कि दंडादेश के बावजूद वसूली न होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई प्रभावी ढंग से लागू नहीं होगी तो बिना मान्यता संचालित विद्यालयों को संरक्षण मिलने का संदेश जाएगा और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित होगी शिकायत में अपर मुख्य सचिव से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, विद्यालय पर लगाए गए आर्थिक दंड की तत्काल रिकवरी सुनिश्चित की जाए तथा यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर कार्रवाई लंबित रखी गई है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में बिना मान्यता संचालित विद्यालयों के विरुद्ध शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की भी मांग की गई है इस शिकायत की प्रतिलिपि जिलाधिकारी गाजियाबाद, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गाजियाबाद तथा खंड शिक्षा अधिकारी मुरादनगर को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

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