करोड़ों की सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का आरोप

संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर क्षेत्र स्थित ग्राम उखलारसी में सरकारी संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि खसरा नंबर 32 से लेकर 36 तक की भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी संपत्ति और बंजर भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद कुछ खसरा नंबरों में तहसील स्तर पर कथित रूप से हेरफेर किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि करोड़ों रुपये कीमत की सरकारी भूमि को कथित तौर पर निजी हितों के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया गया सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि यह सरकारी भूमि मुरादनगर नगर पालिका परिषद कार्यालय और अंबेडकर पार्क के निकट स्थित है। आरोप है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे कर लिए गए हैं और कुछ स्थानों पर बड़े-बड़े निर्माण भी खड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नगर पालिका परिषद के कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण हो रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ रही स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर पालिका परिषद अपने कार्यालय के आसपास स्थित सरकारी भूमि को ही कब्जा मुक्त नहीं करा पा रही है। ऐसे में मुरादनगर क्षेत्र में बंजर भूमि, ऊसर भूमि, तालाब और अन्य सरकारी संपत्तियों पर हुए कथित अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है आरोप यह भी है कि यदि समय रहते राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और खसरा नंबर 32 से 36 तक की भूमि का मौके पर भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया, तो सरकारी संपत्ति पर कथित रूप से किए गए कब्जे और निर्माण भविष्य में और अधिक बढ़ सकते हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है अब बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद मुरादनगर में नगर पालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे कथित तौर पर सरकारी भूमि पर कब्जे और निर्माण कैसे हो रहे हैं मामले में उच्चस्तरीय जांच, राजस्व अभिलेखों की जांच, मौके का सीमांकन और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने