फर्जी अभिलेखों से सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप

संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। नगर विकास परिषद, मुरादनगर के लेटरहेड पर दर्ज दो अलग-अलग जन शिकायतों ने क्षेत्र में सरकारी भूमि और राजस्व अभिलेखों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी भूमि पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जे किए गए हैं और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से सार्वजनिक संपत्तियां लगातार सिकुड़ती जा रही हैं पहली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खसरा नंबर 1170 मि राजस्व अभिलेखों में एलएमसी (LMC), बंजर और अन्य सरकारी श्रेणी की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण कर दिए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन जमीनों का उपयोग सार्वजनिक हित, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए होना चाहिए था, वहां आज बड़े-बड़े मकान और अन्य निर्माण खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच होती तो सरकारी भूमि को बचाया जा सकता था शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित विभागों को कई बार अवगत कराने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि लापरवाही के कारण सरकारी भूमि पर कब्जे बढ़ते गए, जिससे क्षेत्र में जलभराव, पर्यावरणीय असंतुलन और सार्वजनिक सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है वहीं दूसरी शिकायत में एक विशेष खसरा संख्या नम्बर 11से संबंधित भूमि को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसी आधार पर भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। शिकायत में संबंधित अभिलेखों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है दोनों शिकायतों में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए तथा यदि सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा या रिकॉर्ड में अनियमितता पाई जाती है तो उसे तत्काल हटाया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है स्थानीय लोगों का कहना है कि मुरादनगर में लगातार बढ़ते शहरीकरण के बीच सरकारी भूमि, जोहड़, तालाब, बंजर और चारागाह भूमि का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि इन संपत्तियों की समय-समय पर निगरानी और सीमांकन किया जाए तो भविष्य में ऐसे विवादों और अतिक्रमण की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

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