संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। दिल्ली-मेरठ रोड स्थित मुरादनगर के असालतनगर कॉलोनी के समीप खसरा संख्या 286 की भूमि को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए आवंटित आवासीय पट्टों की भूमि का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। उनका दावा है कि इन आवासीय पट्टों पर होटल, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल भूमि उपयोग के नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन भूखंडों का उद्देश्य गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराना था, वहां अब बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। इनमें कई भवनों में छात्रावास, होटल और अन्य व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि कई इमारतों में बेसमेंट सहित चार से पांच मंजिल तक निर्माण किया गया है और दर्जनों कमरों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं।नागरिकों का कहना है कि यदि वास्तव में इन आवासीय पट्टों का उपयोग नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। उनका सवाल है कि यदि भूमि खरीद-फरोख्त, निर्माण और व्यवसाय संचालन में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।स्थानीय लोगों ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में व्यावसायिक इमारतों में हुई दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई तो भविष्य में यहां भी गंभीर हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि कई भवनों में संकरी सीढ़ियां, सीमित निकास मार्ग और अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग की है कि संबंधित भवनों के फायर एनओसी, भवन स्वीकृति, मानचित्र, विद्युत सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था और अन्य आवश्यक अनुमतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।स्थानीय नागरिकों के अनुसार पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर निकाय और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि आवासीय भूमि का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया है तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई अथवा कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि खसरा संख्या 286 की वर्तमान स्थिति, भूमि उपयोग, खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्थान को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गरीबों के लिए आवंटित आवासीय भूमि का वास्तविक उद्देश्य सुरक्षित रखना और जनहित में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि यदि समय रहते तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सकता है और आवासीय पट्टों के दुरुपयोग से जुड़े सभी तथ्यों पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
