कस्बा मुरादनगर की राजस्व संपत्ति कहां चली गई

संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। सरकार एक ओर जल संरक्षण, तालाबों और जोहड़ों के पुनर्जीवन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुरादनगर क्षेत्र के गांव सरना में राजस्व अभिलेखों में दर्ज एक महत्वपूर्ण जोहड़ के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार गांव सरना स्थित खसरा संख्या 712, जो राजस्व रिकॉर्ड में जोहड़ के रूप में दर्ज है, आज मौके पर पूरी तरह लुप्त दिखाई दे रहा है।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से संबंधित विभागों और राजस्व अधिकारियों की उदासीनता के चलते जोहड़ की भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे होते रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप आज वह जोहड़, जो कभी वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण का महत्वपूर्ण स्रोत था, अपने मूल स्वरूप में दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा राजस्व संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब राजस्व रिकॉर्ड में भूमि आज भी जोहड़ के रूप में दर्ज है तो फिर उसका वास्तविक अस्तित्व कहां गायब हो गया। यदि सरकारी भूमि पर कब्जा हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी तथा राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौके का सर्वे कराकर जोहड़ की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और दोषी अधिकारियों एवं कब्जाधारकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। जल संरक्षण को लेकर सरकार के दावों के बीच सरना का यह मामला कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज जोहड़ आखिर कहां चला गया और उसकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए? यह प्रश्न अब स्थानीय जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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