जीडीए की भूमिका पर गंभीर सवाल, शिकायतों के बावजूद निर्माण जारी होने का आरोप

संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण यानी जीडीए की कार्यप्रणाली को लेकर मुरादनगर क्षेत्र में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुरादनगर के गांव खुर्रामपुर स्थित खसरा नंबर 387 में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह भूमि लगभग 70 से 80 बीघा क्षेत्रफल में फैली हुई है और राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के रूप में दर्ज बताई जा रही है स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस सरकारी भूमि पर लगातार निर्माण कार्य चल रहा है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से लगातार शिकायतें भी की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जीडीए के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं लोगों का कहना है कि यदि कोई आम व्यक्ति कस्बे में अपने छोटे से मकान का निर्माण शुरू करता है, तो विकास प्राधिकरण के निचले स्तर से लेकर आला अधिकारियों तक की टीम तत्काल निर्माण रोकने पहुंच जाती है। लेकिन दूसरी ओर, खसरा नंबर 387 में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही—यह बड़ा सवाल है शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जीडीए के अधिकारियों को लगातार शिकायतों और सोशल मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई गई। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में कथित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य जारी रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को कथित रूप से मोटी रकम या सुविधा शुल्क दिया गया है। कुछ सूत्रों का दावा है कि यह निर्माण कार्य कथित रूप से अधिकारियों की जानकारी और निगरानी में चल रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जीडीए की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है अब सवाल यह है कि यदि खसरा नंबर 387 की भूमि वास्तव में सरकारी और बंजर भूमि है, तो वहां निर्माण कार्य कैसे चल रहा है? क्या जीडीए ने इस भूमि का मौके पर निरीक्षण और सीमांकन कराया है? क्या निर्माणकर्ताओं के खिलाफ कोई नोटिस या कार्रवाई की गई मामले में उच्चस्तरीय जांच, राजस्व अभिलेखों के सत्यापन, मौके पर पैमाइश और निर्माण कार्य की अनुमति की जांच की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जीडीए इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं।

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