संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों मरीजों के इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं के लिए चर्चा में है। अस्पताल परिसर में जलभराव, गंदगी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ा दी है। सवाल यह है कि जिस स्वास्थ्य केंद्र में लोगों को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी है, वहां मरीजों को गंदगी और मच्छरों के बीच क्यों बैठना पड़ रहा है हालात ऐसे हैं कि अगर आप अपने घर से इलाज कराने के लिए मुरादनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे हैं तो अपने साथ एक प्लास्टिक का डब्बा या कम से कम एक-दो लीटर पानी की बोतल जरूर लेकर जाएं। अब आप सोच रहे होंगे कि अस्पताल में इलाज कराने जा रहे मरीज को पानी की बोतल साथ लेकर जाने की सलाह क्यों दी जा रही है दरअसल, स्वास्थ्य केंद्र के शौचालयों की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शौचालय में कई बार पानी उपलब्ध नहीं रहता। ऐसे में मरीज और तीमारदार शौच के बाद हाथ तक कैसे धोएं? क्या स्वास्थ्य केंद्र प्रशासन मरीजों को संक्रमण से बचाने के बजाय संक्रमण फैलने का इंतजाम कर रहा है एक तरफ अस्पताल परिसर में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शौचालयों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं होने के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है या फिर अधिकारियों और कर्मचारियों की तानाशाही, जिन्हें जनता की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर हालात का निरीक्षण करेंगे क्या जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी? या फिर मरीज इसी तरह गंदगी, जलभराव और अव्यवस्थाओं के बीच इलाज कराने को मजबूर रहेंगे?
