संवाददाता यूसुफ खान
गाजियाबाद के मुरादनगर का अजीबो गरीब मामला सामने आया है फर्जी दस्तावेज़ों के दम पर संपत्ति हड़पने का खेल, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित अपनी ही ज़मीन पर कब्ज़ा पाने के लिए एक पीड़ित सरकारी दफ्तरों की चौखटें नापने को मजबूर है। जिला उपाधिकारी से लेकर लेखपाल तक लगातार गुहार लगाने के बावजूद उसे अब तक न्याय नहीं मिल सका। सवाल यह है कि जब किसी व्यक्ति के पास अपनी ज़मीन के दस्तावेज़ मौजूद हैं, तो फिर उसे अपने ही हक़ के लिए इतनी लंबी लड़ाई क्यों लड़नी पड़ रही है पीड़ित का आरोप है कि उसकी भूमि के कथित रूप से फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर उस पर कब्ज़ा करने की कोशिश की गई। उसने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय की उम्मीद में वह लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है जब पीड़ित ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती सुनाई, तो उसकी दर्दभरी कहानी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यदि फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर किसी की संपत्ति पर दावा किया जा सकता है, तो आम नागरिक की ज़मीन कितनी सुरक्षित है? और यदि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो भूमाफियाओं और फर्जीवाड़ा करने वालों के हौसले क्यों नहीं बढ़ेंगे सबसे बड़ा सवाल उन लोगों पर भी है जो कथित रूप से फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर दूसरों की ज़मीन हड़पने की कोशिश करते हैं। आखिर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कब होगी? क्या ऐसे मामलों में केवल शिकायतें दर्ज होती रहेंगी, या दोषियों को कानून के दायरे में लाकर पीड़ितों को उनका अधिकार भी दिलाया जाएगा अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि पीड़ित को उसकी ज़मीन पर न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाते हैं और कथित फर्जीवाड़े के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कब कार्रवाई होती है।
