शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं; 'बाबा का बुलडोजर' भी सवालों के घेरे में

संवाददाता यूसुफ खान
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार जहां सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बुलडोजर अभियान चलाने का दावा करती है, वहीं गाजियाबाद के गांव खुर्रमपुर स्थित खसरा संख्या 387 का मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि करीब 70 बीघा सरकारी बंजर भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अधिकारियों की कथित मिलीभगत से लंबे समय से अवैध निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।शिकायतकर्ताओं के अनुसार खसरा संख्या 387 सरकारी बंजर भूमि है, जिस पर वर्ष 1400 फसली से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा और निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन, राजस्व विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। किसान यूनियन भानू संगठन ने भी पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि जब भी जिलाधिकारी के यहां शिकायत पहुंचती है तो कुछ दिनों के लिए निर्माण कार्य रुक जाता है, लेकिन दो-चार दिन बाद फिर से निर्माण शुरू हो जाता है। यही सिलसिला लंबे समय से जारी है, जिससे शिकायतकर्ताओं में भारी नाराजगी है। वहीं दूसरी ओर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-2 द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध निर्माणों पर लगातार बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि खसरा संख्या 387 पर आज तक एक बार भी बुलडोजर नहीं चला। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं न कहीं संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि पर कब्जे के मामलों में एक समान कार्रवाई नहीं होगी तो सरकार की भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल उठेंगे। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण पर टिकी हैं कि आखिर इस चर्चित प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा या शिकायतें यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएंगी।

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