विद्युत विभाग में आउटसोर्स कर्मियों पर गंभीर आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल

संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के अंतर्गत विद्युत वितरण खंड 33/11 मुरादनगर में कार्यरत कुछ आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों तथा समाजसेवी महंत डॉ. विजयपाल हितकारी द्वारा विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी गई शिकायतों में कुछ कर्मचारियों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लाइनमैन के रूप में नियुक्त कुछ आउटसोर्स कर्मचारी कथित रूप से कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य कर रहे हैं और बिजली बिलों में संशोधन, बकाया राशि (एरियर) कम करने तथा चुनिंदा उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने जैसे कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उनका दावा है कि इससे विभाग को आर्थिक नुकसान हो रहा है और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ संविदा कर्मियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि वे विभागीय अधिकारियों से भी अधिक प्रभावशाली भूमिका में दिखाई देते हैं। आरोप है कि विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों में इन कर्मचारियों की दखलंदाजी बढ़ती जा रही है, जिससे विभागीय व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महंत डॉ. विजयपाल हितकारी सहित अन्य शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि विभागीय नियमों के विपरीत कुछ आउटसोर्स कर्मचारी अपने गृह क्षेत्र अथवा उसके निकट ही तैनात हैं। जबकि सामान्यतः ऐसी नियुक्तियों में हितों के टकराव से बचने के लिए दूरी बनाए रखने का प्रावधान माना जाता है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। विवाद का एक अन्य पहलू कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सीमित वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों की जीवनशैली और संसाधनों को देखते हुए उनकी आय के स्रोतों की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि आरोपित कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। मीडिया द्वारा जब बिजली बिलों में संशोधन और कथित रूप से एरियर समाप्त होने के मामलों को लेकर अधिशासी अभियंता अंकित से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने इसे सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ी बताया। हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराए बिना केवल सिस्टम की गड़बड़ी बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर शिकायतों पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया जा रहा। नागरिकों ने पीवीवीएनएल के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने