संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर नगर विकास परिषद की ओर से तहसील प्रशासन को भेजी गई तीन अलग-अलग शिकायतों ने सरकारी भूमि, अवैध निर्माण और कथित फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने उपजिलाधिकारी मुरादनगर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पहली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खसरा संख्या 379 की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरकारी अभिलेखों के विपरीत भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है। दूसरी शिकायत खसरा संख्या 371, 380 और 381 से संबंधित है, जिसमें आरोप है कि लगभग 18 फुट चौड़ी सरकारी गली पर अवैध कब्जा कर रास्ते को संकरा कर दिया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासनिक नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
वहीं तीसरी शिकायत में खसरा संख्या 65 से 67 व 721 की भूमि को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार संबंधित भूमि पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा और निर्माण की कोशिश की जा रही है। मामले की निष्पक्ष जांच कर राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग भी की गई है। तीनों शिकायतें उपजिलाधिकारी मुरादनगर को सौंपे जाने के बाद अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी भूमि की सुरक्षा और राजस्व व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा। जब इस प्रकरण पर उप जिला अधिकारी मोदी नगर अजीत सिंह से जानकारी फोन पर प्राप्त करनी चाहिए तो उप जिला अधिकारी ने फोन उठाना गवारा नहीं समझा कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
