संवाददाता यूसुफ खान
मुरादनगर उत्तर प्रदेश सरकार जहां मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) के माध्यम से जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण का दावा करती है, वहीं गाजियाबाद जनपद की मुरादनगर नगर पालिका परिषद की कार्यशैली इन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है 20 जून 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत में बस स्टैंड से ओलंपिक तिराहा, जीटी रोड, तीन नंबर चुंगी, रावली रोड, कस्बा बाजार और रेलवे रोड तक फैले अवैध अतिक्रमण तथा अवैध पार्किंग स्टैंड को हटाने की मांग की गई थी आरोप है कि शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई का दावा तो कर दिया गया, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद केवल कागजी कार्रवाई और औपचारिकताएं पूरी करने तक सीमित है अतिक्रमण हटाने के नाम पर कभी-कभार प्रतीकात्मक अभियान चलाया जाता है, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर से सड़कें अवैध कब्जों और अवैध पार्किंग से भर जाती हैं ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का वास्तविक निस्तारण हो रहा है या केवल फाइलों में रिपोर्ट लगाकर उन्हें बंद किया जा रहा है सबसे गंभीर चिंता यह है कि यदि कस्बे में आग लगने, सड़क दुर्घटना या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड अथवा एंबुलेंस को मौके पर पहुंचना पड़े, तो अवैध अतिक्रमण और सड़कों पर खड़े वाहनों के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है संकरी होती सड़कों और अव्यवस्थित यातायात के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर पालिका परिषद को कई बार अवगत कराने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है इससे यह भी प्रश्न उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों और आईजीआरएस व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है, या फिर शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित रह गया है अब स्थानीय नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आईजीआरएस शिकायत पर वास्तविक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा अवैध अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के खिलाफ स्थायी अभियान चलाकर आम जनता को सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराया जाए
