खसरा संख्या 784 मि. में दर्ज जोहड़ पर खड़ी हो गईं इमारतें, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल


संवाददाता यूसुफ खान
गाजियाबाद के मुरादनगर के रावली रोड स्थित खसरा संख्या 784 मि., जो राजस्व अभिलेखों में जोहड़ (जल संरक्षण भूमि) के रूप में दर्ज बताई जाती है, उस पर कथित रूप से बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण होने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से जोहड़ की भूमि पर धीरे-धीरे कब्जा कर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गईं, लेकिन संबंधित राजस्व विभाग और जिला प्रशासन ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की क्षेत्रवासियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में आज भी उक्त भूमि जोहड़ के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद वहां बड़े-बड़े भवन बने हुए हैं। आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई की होती तो सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण को रोका जा सकता था। लोगों का यह भी कहना है कि जल संरक्षण के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने से भविष्य में जलभराव और पर्यावरण संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी अभिलेखों में भूमि की प्रकृति स्पष्ट दर्ज है, तब इतने बड़े निर्माण कार्य कैसे होते रहे और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। फिलहाल इस मामले में राजस्व विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा जोहड़ की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराने की मांग की है।

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